मैसूर महल image

मैसूर: पर्यटन की नगरी

भारत के कर्नाटक राज्य के मैसूर जिले में स्थित एक नगर है। यह कर्नाटक का दूसरा सबसे बड़ा शहर है और यह प्रदेश की राजधानी बैंगलुरु से लगभग 150 किलोमीटर दक्षिण में केरल की सीमा पर स्थित है।

पर्यटन
मैसूर न सिर्फ कर्नाटक में पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि आसपास के अन्य पर्यटक स्थलों के लिए एक कड़ी के रूप में भी काफी महत्वपूर्ण स्थल है। शहर के सबसे ज्यादा पर्यटन मैसूर के दशहरा उत्सव के दौरान आते है। जब मैसूर महल एवं आसपास के स्थलों तथा जगमोहन पैलेस जयलक्ष्मी विलास एवं ललित महल काफी चहल पहल एवं त्यौहार सा माहौल होता है। साथ ही कर्ण झील चिड़िया खाना इत्यादि भी काफी आकर्षण का केंद्र होते है। मैसूर के संग्रहालय भी काफी पर्यटकों को आकर्षित करते है मैसूर में थोड़ी दूर कृष्ण राज सागर डैम एवं उससे लगा वृन्दावन गार्डन अत्यंत मोहक स्थलों में से है।

भूत पूर्व महाराजा का महल , विशाल चिड़िया घर, नगर के पास ही कृष्ण राज सागर बाँध ,वृंदावन वाटिका , चामुण्डी की पहाड़ी तथा सोमनाथपुर का मंदिर आदि दर्शनीय स्थान है। इन्ही आकर्षणों के कारण इसे पर्यटकों का स्वर्ग कहते है। यहां पर सूती एवं रेशमी कपड़ें ,चंदन का साबुन , बटन , बेंत एवं अन्य कलात्मक वस्तुएँ भी तैयार की जाती है। यहाँ प्रसिद्ध मैसूर विश्वविद्यालय भी है।

रेल संग्रहालय
यह संग्रहालय कृष्णराज सागर रोड पर स्थित सीएफटी रिसर्च इंस्टीट्यूट के सामने है। यहाँ मैसूर स्टेट रेलवे की उन चीजों को प्रदर्शित किया गया है जो 1881-1979 के बीच की है। 1979 में स्थापित इस संग्रहालय में एक विशेष क्षेत्र से जुडी हुई वस्तुओं का अच्छा संग्रह है। यहाँ प्रदर्शित वस्तुओं में भाप चलने वाले इंजन , सिग्रल और 1899 बना सभी सुविधओं वाला महारानी का सैलून शामिल है। यह संग्रहालय बच्चों का मनोरंजन करने के साथ -साथ उनके ज्ञान को भी बढ़ाता है। समय :सुबह 10 बजे-दोपहर 1 बजे तक ,दोपहर 3 बजे -रात 8 बजे तक खुला रहता है।


यह महल मैसूर में आकर्षण सबसे बड़ा केन्द्र है। मिर्जा रोड पर स्थित यह महल भारत के सबसे बड़े महलों में से एक है।इस महल को अम्बा विशाल महल से भी जाना जाता है। इसमें मैसूर राज्य के वुडेयार महाराज रहते थे। जब लकड़ी का महल जल गया था ,तब इस महल का निर्माण कराया गया था।

समय : सुबह 10 बजे -शाम 5 :30 बजे तक ,उचित शुल्क ,जुते -चम्पल अंदर मना ,कैमरा ले जाना मना था। यह महल रविवार , राष्ट्रीय अवकाश के दिन शाम 7 -8 बजे तक और दशहरा के दौरान शाम 7 बजे-रात 9 बजे तक रोशनी से जगमगाता है।

जगमोहन महल
इस महल का निर्माण महाराज कृष्ण राज वोडेयार ने सन 1861 में करवाया था। यह मैसूर की सबसे पुरानी इमारतों में से एक है। यह तीन मंजिला इमारत सिटी बस स्टैंड से 10 मिनट की दूरी पर है समय : सुबह 8 :30 बजे -शाम 5:30 बजे तक खुला रहता है और इसमें कैमरा ले जाना मना है।

सेंट फिलोमेना चर्च
1933 में बना यह चर्च भारत के सबसे बड़े चर्च में से एक है। मैसूर शहर से 3 किमी दूर कैथ्रेडल रोड पर स्थित यह चर्च निओ-गोथिक शैली निर्मित है। वर्तमान में इस चर्च को सेंट जोसेफ चर्च के नाम से जाना जाता है। समय :सुबह 5 बजे-शाम 8 बजे तक खुला रहता है।

चामुंडी पहाड़ी
मैसूर से 13 किलोमीटर दक्षिण स्थित चामुंडा पहाड़ी मैसूर का एक प्रमुख पर्यटक स्थल है। इस पहाड़ी की छोटी पर चामुंडेश्वरी मंदिर है जो देवी दुर्गा को समर्पित है इस मंदिर का निर्माण 12वी शताब्दी में किया गया था। मंदिर की इमारत सात मंजिला है जिसकी कुल ऊंचाई 40 मी. है। मुख्य मंदिर के पीछे महाबलेश्वर समर्पित एक छोटा सा मंदिर भी है जो 1000 साल से भी ज्यादा पुराना है।

पूजा का समय : सुबह 7 :30 बजे-दोपहर 2 बजे तक ,दोपहर 3:30 बजे -शाम 6 बजे तक , शाम 7 :30 बजे -रात 9 बजे तक खुला रहता है

कृष्ण राज सागर बांध
कृष्ण राज सागर बांध या केआरएस बांध 1932 में बना यह बांध मैसूर से 12 किमी उत्तर-पश्चिम में स्थित है। इसका निर्माण कृष्णराज वुडेयार चतुर्थ के शासन काल में हुआ था। इस बांध की लम्बाई 8600 फिट , ऊंचाई 130 फिट और क्षेत्रफल 130वर्ग किलोमीटर है। यह बांध आजादी से पहले की सिविल इंजीनियरिंग नमूना है। समय : सुबह 7 बजे-रात 8 बजे तक।

जीआरएस फैंटेसी पार्क
यह पार्क मैसूर का एकमात्र अम्यूजमेंट वॉटर पार्क है। 30 एकड़ में फैला यह पार्क सभी उम्र के लोगों को अपनी और आकर्षित करता है इस पार्क के मुख्य आकर्षण पानी के खेल , रोमांचक सवारी और बच्चों के लिए तालाब है। पार्क के अंदर शाकाहारी खाने का एक रेस्टोरेंट भी है। बाहर से खाने-पानी सामान लाना मना है। समय :सोमवार से शुक्रवार सुबह 10:30 बजे -शाम 6 बजे तक , रविवार और सार्वजनिक अवकाश के दिन शाम 7 :30 बजे तक , गर्मियों में शनिवार के दिन भी 7 :30 बजे तक खुलता है।

मैसूर चिड़ियाघर
यह चिड़ियाघर विश्व के सबसे पुराने चिड़ियाघरों में से एक है। इसका निर्माण 1892 में शाही संरक्षण में हुआ था। यहाँ के बगीचों को बहुत ही खूबसूरती से सजाया और संभाला गया है। यह बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी आते है। शेर यहाँ के मुख्य आकर्षण है। इसके अलावा हाथी , सफ़ेद मोर , दरियाई घोड़े ,गैंडे और गोरिल्ला भी यहं देखे जा सकते है। चिड़ियाघर में करंजी झील भी है। इस चिड़िया घर में 40 से भी ज्यादा देशों लाए गए जानवरों को रखा गया है। जहाँ भारतीय और विदेशो पेड़ों की करीब 85 प्रजातियों रखा गया है। समय : सुबह 8 बजे-शाम 5 :30 बजे तक , मंगलवार को बंद रहता है।

रेल संग्रहालय
यह संग्रहालय कृष्णराज सागर रोड पर स्थित सीएफटी रिसर्च इंस्टीट्यूट के सामने है। यहाँ मैसूर स्टेट रेलवे की उन चीजों को प्रदर्शित किया गया है जो 1881-1979 के बीच की है। 1979 में स्थापित इस संग्रहालय में एक विशेष क्षेत्र से जुडी हुई वस्तुओं का अच्छा संग्रह है। यहाँ प्रदर्शित वस्तुओं में भाप चलने वाले इंजन , सिग्रल और 1899 बना सभी सुविधओं वाला महारानी का सैलून शामिल है। यह संग्रहालय बच्चों का मनोरंजन करने के साथ -साथ उनके ज्ञान को भी बढ़ाता है। समय :सुबह 10 बजे-दोपहर 1 बजे तक ,दोपहर 3 बजे -रात 8 बजे तक खुला रहता है।

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